सिद्धार्थनगर जिले के मिश्रौलिया क्षेत्र के उड़वलिया गांव स्थित हजरत बाबा दरिया शाह अलैहिर्रहमा की दरगाह पर 31वें सालाना उर्स का आगाज गुरुवार से हो गया। दो दिवसीय उर्स को लेकर दरगाह परिसर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उर्स में शामिल होने के लिए सिद्धार्थनगर के अलावा आसपास के क्षेत्रों और दूर-दराज से अकीदतमंदों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। सुबह से ही जायरीन दरगाह पर पहुंचकर चादरपोशी कर रहे हैं और बाबा के आस्ताने पर मन्नतें मांगकर अपनी अकीदत पेश कर रहे हैं।
दरगाह पर सजीं दुकानें, मेले में बढ़ी रौनक
उर्स को लेकर दरगाह परिसर और आसपास के मेले में खास सजावट की गई है। जायरीनों की सुविधा के लिए खाने-पीने और ठहरने के इंतजाम किए गए हैं। मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें सज गई हैं। बच्चों और युवाओं के मनोरंजन के लिए झूले भी लगाए गए हैं। दुकानों और झूलों के चलते मेले में दिनभर चहल-पहल बनी हुई है। आयोजन समिति की ओर से बाहर से आने वाले जायरीनों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। दरगाह तक पहुंचने के रास्ते पर भी व्यवस्थाएं की गई हैं।
रात में गूंजेगी सूफियाना कव्वाली
उर्स के पहले दिन गुरुवार रात प्रसिद्ध कव्वालों की ओर से सूफियाना कव्वाली पेश की जाएगी। कव्वाल बाबा दरिया शाह की शान में कलाम प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के पहुंचने की उम्मीद है। कव्वाली कार्यक्रम को लेकर आयोजन समिति की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
शुक्रवार को होंगे कई धार्मिक कार्यक्रम
उर्स के दूसरे दिन शुक्रवार को अलग-अलग नमाज के बाद धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जोहर की नमाज के बाद कुरानखानी होगी। इसके बाद असर की नमाज के बाद पारंपरिक चादरपोशी की रस्म अदा की जाएगी। मगरिब की नमाज के बाद गागर शरीफ का जुलूस निकाला जाएगा। वहीं इशा की नमाज के बाद नात शरीफ, तकरीर और अन्य मजहबी कार्यक्रम आयोजित होंगे। देर रात 12:25 बजे कुल शरीफ की रस्म के साथ दो दिवसीय उर्स का समापन होगा।
उलेमा और शायर भी होंगे शामिल
आयोजन समिति के अध्यक्ष मुनव्वर हुसैन ने बताया कि उर्स में कई जाने-माने उलेमा और शायर भी शिरकत करेंगे। उन्होंने बताया कि मिठौवा चौराहे से करीब दो किलोमीटर उत्तर स्थित उड़वलिया गांव में दरगाह तक पहुंचने के लिए व्यवस्था की गई है।उन्होंने लोगों से अधिक संख्या में पहुंचकर उर्स में शामिल होने और आयोजन को सफल बनाने की अपील की। समिति के अनुसार उर्स धार्मिक कार्यक्रमों के साथ आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश देने का भी माध्यम बनेगा। उर्स को लेकर दरगाह और मेले में अकीदतमंदों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है।