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हर खेत की मेड़ पर एक पेड़' का मंत्र: सिद्धार्थनगर में KVK के वैज्ञानिकों ने बताया आय बढ़ाने का फॉर्मूला, किसानों को बांटे 300 से ज्यादा पौधे

सिद्धार्थनगर में KVK के वैज्ञानिकों ने बताया आय बढ़ाने का फॉर्मूला, किसानों को बांटे 300 से ज्यादा पौधे

सिद्धार्थनगर जिले में बढ़ते तापमान, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकट के बीच कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सोहना ने शनिवार को किसानों को प्रकृति संरक्षण के साथ आय बढ़ाने का संदेश दिया। वन महोत्सव के तहत आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने श्हर खेत की मेड़ पर एक पेड़श् लगाने का आह्वान किया। इस दौरान केंद्र परिसर में फलदार और वानिकी प्रजातियों के पौधे रोपे गए, वहीं किसानों को 300 से अधिक फलदार एवं छायादार पौधों का निःशुल्क वितरण किया गया।

पौधरोपण को बताया समय की सबसे बड़ी जरूरत

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा कि लगातार बढ़ता तापमान और बदलता मौसम खेती के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रहा है। ऐसे में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण ही पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने किसानों से अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ उनकी नियमित देखभाल करने की अपील की।

मेड़ों पर पेड़, किसानों को दोहरा फायदा

कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिक इं. अशोक कुमार पाण्डेय ने किसानों को खेतों की मेड़ों पर वृक्ष लगाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा, बल्कि लकड़ी और फल के रूप में किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिलेगा। उन्होंने इसे खेती के साथ दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा का बेहतर विकल्प बताया।

फलदार और छायादार पौधों का महत्व बताया

उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने कहा कि पीपल, बरगद, पाकड़, नीम, कदंब और पलाश जैसे वृक्ष पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं आम, लीची, आंवला, जामुन और अमरूद जैसे फलदार पौधे किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देते हैं।

जैव विविधता और मिट्टी संरक्षण पर जोर

कृषि प्रसार वैज्ञानिक डॉ. शेष नारायण सिंह ने वृक्षारोपण के पर्यावरणीय और आर्थिक लाभों पर प्रकाश डाला। बीज वैज्ञानिक डॉ. सर्वजीत ने जैव विविधता के संरक्षण के लिए विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाने की आवश्यकता बताई। वहीं मृदा वैज्ञानिक डॉ. प्रवेश कुमार ने कहा कि वृक्ष मिट्टी के कटाव और भूमि क्षरण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

300 से अधिक पौधों का वितरण

कार्यक्रम के दौरान किसानों को 300 से अधिक फलदार और वानिकी प्रजातियों के पौधे वितरित किए गए। पशु वैज्ञानिक डॉ. सुनील सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को कम करने में वृक्षारोपण सबसे प्रभावी और टिकाऊ उपायों में से एक है। कार्यक्रम में नीलम सिंह, डॉ. मार्कंडेय सिंह, दीप नारायण सिंह, विजय यादव, ओमप्रकाश, चौतू प्रसाद सहित बड़ी संख्या में किसान और कृषि विशेषज्ञ मौजूद रहे।

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