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धान रोपाई के बीच खाद की नहीं होगी किल्लत: सिद्धार्थनगर में डीएपी-एनपीके समेत पर्याप्त स्टॉक; कालाबाजारी पर होगी सख्त कार्रवाई

सिद्धार्थनगर में डीएपी-एनपीके समेत पर्याप्त स्टॉक; कालाबाजारी पर होगी सख्त कार्रवाई

सिद्धार्थनगर जिले में धान की रोपाई तेज होने के साथ फास्फेटिक उर्वरकों की मांग बढ़ गई है। इसे देखते हुए कृषि विभाग ने दावा किया है कि जिले में डीएपी, एनपीके, एसएसपी और अन्य उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। साथ ही विभाग ने उर्वरक विक्रेताओं को चेतावनी दी है कि निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने, गैर-अनुदानित उत्पादों की जबरन टैगिंग करने या नियमों का उल्लंघन करने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सहकारी और निजी केंद्रों पर पर्याप्त स्टॉक

जिला कृषि अधिकारी रविशंकर पाण्डेय ने बताया कि जिले के सभी सहकारी एवं निजी उर्वरक बिक्री केंद्रों पर किसानों की जरूरत के अनुरूप खाद उपलब्ध है। वर्तमान में यूरिया 37,621.706 मीट्रिक टन, डीएपी 7,895.969 मीट्रिक टन, एनपीके 8,154.278 मीट्रिक टन, एमओपी 666.166 मीट्रिक टन तथा एसएसपी 22,034.611 मीट्रिक टन का स्टॉक मौजूद है। इसके अलावा फास्फेटिक उर्वरकों में एनपीके, टीएसपी और एसएसपी भी उपलब्ध हैं, जिनमें फास्फोरस और सल्फर की पर्याप्त मात्रा होती है। यह पौधों की जड़ों को मजबूत बनाने, बेहतर बढ़वार और फसल को स्वस्थ रखने में सहायक हैं।

इन दस्तावेजों के आधार पर मिलेगा उर्वरक

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी आवश्यकता के अनुसार नजदीकी उर्वरक बिक्री केंद्र से खतौनी, फार्मर रजिस्ट्री अथवा सहकारी समिति की सदस्यता पासबुक के आधार पर ही उर्वरक खरीदें। विभाग का कहना है कि सभी बिक्री केंद्रों पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही खाद का वितरण किया जाएगा।

पीओएस मशीन से होगी बिक्री, पूरा रिकॉर्ड रखना होगा

जिला कृषि अधिकारी ने सभी सहकारी समितियों और निजी उर्वरक विक्रेताओं को निर्देश दिए हैं कि किसानों को केवल पीओएस मशीन के माध्यम से ही उर्वरक का वितरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही वितरण रजिस्टर में किसान का आधार नंबर, खतौनी संख्या, फार्मर आईडी, रकबा, मोबाइल नंबर और वितरित उर्वरक की मात्रा का पूरा विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा।

ओवररेटिंग और टैगिंग पर सख्त चेतावनी

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर उर्वरक की बिक्री नहीं की जाएगी। इसके अलावा गैर-अनुदानित उत्पादों की जबरन टैगिंग भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि कोई विक्रेता इन निर्देशों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 के तहत विधिक कार्रवाई की जाएगी। कृषि विभाग ने किसानों से भी अपील की है कि किसी प्रकार की अनियमितता मिलने पर तत्काल विभाग को सूचना दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

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