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सिद्धार्थनगर में साइबर ठगों पर पुलिस का वार: AEPS फ्रॉड के शिकार किसान के खाते में लौटे पूरे 20 हजार रुपए

AEPS फ्रॉड के शिकार किसान के खाते में लौटे पूरे 20 हजार रुपए

सिद्धार्थनगर जिले में साइबर ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई का एक और उदाहरण सामने आया है। गोल्हौरा थाना पुलिस की साइबर सेल ने एईपीएस (आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम) के जरिए ठगी का शिकार हुए एक व्यक्ति की 20 हजार रुपये की पूरी रकम वापस कराकर उसे बड़ी राहत दिलाई। पुलिस की इस कार्रवाई से पीड़ित की मेहनत की कमाई सुरक्षित लौट आई, वहीं साइबर अपराधों के खिलाफ चल रहे अभियान को भी मजबूती मिली।

एनसीआरपी शिकायत पर तुरंत शुरू हुई कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, थाना गोल्हौरा क्षेत्र के खड़रिया बुजुर्ग गांव निवासी सहजराम ने 16 जून 2026 को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि एईपीएस के माध्यम से उनके खाते से 20 हजार रुपये की धोखाधड़ी कर ली गई है। शिकायत मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के निर्देश पर चल रहे साइबर फ्रॉड रिकवरी अभियान के तहत मामले की जांच शुरू कर दी गई।

बैंक से समन्वय कर वापस कराई पूरी रकम

अपर पुलिस अधीक्षक प्रशान्त कुमार प्रसाद के निर्देशन, क्षेत्राधिकारी इटवा प्रवीण प्रकाश के पर्यवेक्षण तथा थानाध्यक्ष रामदेव के नेतृत्व में गोल्हौरा थाना साइबर सेल ने संबंधित बैंक के साथ समन्वय स्थापित कर तकनीकी जांच की। लगातार प्रयासों के बाद पुलिस ने ठगी गई पूरी 20 हजार रुपये की धनराशि शिकायतकर्ता के बैंक खाते में वापस करा दी।

मेहनत की कमाई लौटने पर जताया आभार

खाते में पूरी रकम वापस आने के बाद पीड़ित सहजराम ने सिद्धार्थनगर पुलिस और साइबर सेल की कार्यशैली की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। पुलिस का कहना है कि समय पर शिकायत दर्ज होने से साइबर ठगी के मामलों में धनराशि वापस कराने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

साइबर ठगी पर पुलिस की अहम सलाह

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होती है तो घबराने के बजाय तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। शुरुआती समय में की गई शिकायत से धनराशि को होल्ड कराकर रिकवरी की संभावना अधिक रहती है।

इस कार्रवाई में थानाध्यक्ष रामदेव, उपनिरीक्षक प्रमोद कुमार पाण्डेय, कांस्टेबल विकास सिंह, अभिषेक सिंह, अजय विश्वकर्मा, महिला कांस्टेबल खुशबू यादव तथा नीशू गुप्ता की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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