सिद्धार्थनगर जिले में साइबर ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई का एक और मामला सामने आया है। थाना मिश्रौलिया पुलिस की साइबर सेल ने एईपीएस (आधार आधारित भुगतान प्रणाली) के जरिए हुई धोखाधड़ी के शिकार एक व्यक्ति की 5,200 रुपये की पूरी धनराशि वापस कराकर उसे राहत दिलाई। पुलिस की सक्रियता और बैंक के सहयोग से यह रकम पीड़ित के खाते में वापस पहुंचाई गई।
AEPS के जरिए हुई थी ठगी
पुलिस के मुताबिक, थाना मिश्रौलिया क्षेत्र के ग्राम गौरड़ीह निवासी रामलाल, पुत्र जढ़ई, ने 16 मार्च 2026 को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया था कि एईपीएस के माध्यम से उनके साथ वित्तीय धोखाधड़ी हुई है, जिसमें उनके खाते से 5,200 रुपये निकाल लिए गए।
शिकायत मिलते ही शुरू हुई कार्रवाई
शिकायत प्राप्त होते ही थाना मिश्रौलिया की साइबर सेल ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने संबंधित बैंक से संपर्क कर लेनदेन का विवरण जुटाया और आवश्यक तकनीकी प्रक्रिया पूरी की। लगातार समन्वय और फॉलोअप के बाद ठगी गई पूरी धनराशि पीड़ित के बैंक खाते में वापस करा दी गई।
धनराशि लौटने पर जताया आभार
खाते में 5,200 रुपये वापस आने के बाद पीड़ित रामलाल ने पुलिस और साइबर सेल की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। पुलिस का कहना है कि समय पर शिकायत दर्ज होने से साइबर फ्रॉड के मामलों में रकम वापस कराने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
इनकी रही अहम भूमिका
यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के निर्देशन में चलाए जा रहे साइबर फ्रॉड धनराशि रिकवरी अभियान के तहत की गई। अभियान का संचालन अपर पुलिस अधीक्षक प्रशान्त कुमार प्रसाद, क्षेत्राधिकारी इटवा प्रवीण प्रकाश के पर्यवेक्षण तथा प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में हुआ। साइबर प्रभारी उपनिरीक्षक श्याम कन्हैया दूबे, कांस्टेबल संतोष कुमार सिंह, आशुतोष सिंह और आकाश कुमार ने धनराशि वापस कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पुलिस की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का शिकार हों तो बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर सूचना मिलने पर ठगी गई धनराशि को होल्ड कराकर वापस कराने की संभावना काफी बढ़ जाती है।