सिद्धार्थनगर जिले में लंबित मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान के तहत ढेबरुआ थाना पुलिस और जिला मॉनिटरिंग सेल को बड़ी सफलता मिली है। वर्ष 2015 के अपहरण के एक मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए पांच वर्ष के कठोर कारावास और 15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। पुलिस ने इसे प्रभावी पैरवी का परिणाम बताया है।
अपहरण के मामले में सुनाया फैसला
पुलिस के अनुसार वाद संख्या 91/2017, मुकदमा अपराध संख्या 1314/2015 में थाना ढेबरुआ पर भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 376, 506, पॉक्सो एक्ट तथा एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई के बाद गुरुवार को एएसजे/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) वीरेंद्र कुमार की अदालत ने आरोपी शाह आलम, निवासी पचमोहनी, थाना ढेबरुआ को अपहरण के अपराध में दोषी करार दिया। अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के तहत पांच वर्ष के कठोर कारावास तथा 15 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
प्रभावी पैरवी से मिली सफलता
पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के निर्देशन में जिले में गंभीर मामलों में प्रभावी पैरवी कर दोषियों को सजा दिलाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में इस मामले में जिला मॉनिटरिंग सेल और थाना ढेबरुआ पुलिस ने न्यायालय में साक्ष्यों और तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।
इनकी रही अहम भूमिका
पुलिस के मुताबिक, आरोपी को सजा दिलाने में जिला मॉनिटरिंग सेल, अभियोजक पवन कुमार पाठक तथा न्यायालय पैरोकार मुख्य आरक्षी अभिमन्यु कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों ने इसे ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान की एक अहम उपलब्धि बताते हुए कहा कि गंभीर आपराधिक मामलों में प्रभावी विवेचना और मजबूत पैरवी के जरिए दोषियों को कानून के मुताबिक सजा दिलाने का अभियान आगे भी जारी रहेगा।