सिद्धार्थनगर जिले में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में सिद्धार्थनगर की अदालत ने मंगलवार को आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने दोषी पर 50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। यह फैसला थाना इटवा में दर्ज पुराने मुकदमे में पुलिस की प्रभावी पैरवी और अभियोजन पक्ष की दलीलों के बाद आया। पुलिस ने इसे गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता बताया है।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत हुई पैरवी
पुलिस के अनुसार पुलिस महानिदेशक की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत गंभीर अपराधों में आरोपियों को सजा दिलाने के लिए लगातार प्रभावी पैरवी की जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के निर्देशन में थाना स्तर से लेकर मॉनिटरिंग सेल तक मुकदमों की पैरवी और साक्ष्यों की निगरानी की जा रही है। इसी अभियान के तहत थाना इटवा के मुकदमा अपराध संख्या 24/2023, वाद संख्या 295/23 की सुनवाई एएसजे/एसपील/पॉक्सो न्यायालय, सिद्धार्थनगर में हुई।
पॉक्सो एक्ट में दोषी करार
मामले में अभियुक्त वासुदेव विश्वकर्मा पुत्र श्रीराम विश्वकर्मा, निवासी खुनियाव लक्ष्मीनगर, थाना इटवा, सिद्धार्थनगर के खिलाफ धारा 376(3), 506 भादवि तथा धारा 5J(ii)/6 पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय के समक्ष प्रभावी पैरवी की गई। उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी करार दिया।
20 साल का कठोर कारावास
न्यायालय के न्यायाधीश वीरेन्द्र कुमार ने अभियुक्त वासुदेव विश्वकर्मा को धारा 376(3) भादवि के साथ धारा 5J(ii)/6 पॉक्सो एक्ट के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 50 हजार रुपए के अर्थदंड से भी दंडित किया गया। पुलिस के मुताबिक मामले में प्रभावी पैरवी के कारण अभियोजन पक्ष न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखने में सफल रहा।
मॉनिटरिंग सेल और पैरोकार की भूमिका
पुलिस ने बताया कि मामले में सजा दिलाने के लिए जिला मॉनिटरिंग सेल, अभियोजक पवन कुमार पाठक और थाना इटवा के न्यायालय पैरोकार आरक्षी संजय चौरसिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा। पुलिस स्तर से मुकदमे की लगातार निगरानी करते हुए आवश्यक दस्तावेज और कार्रवाई समय पर सुनिश्चित की गई।
गंभीर अपराधों में जारी रहेगी पैरवी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार गंभीर अपराधों में दोषियों को न्यायालय से सजा दिलाने के लिए प्रभावी पैरवी आगे भी जारी रहेगी। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत ऐसे मामलों को चिह्नित कर उनकी सुनवाई और पैरवी की प्रगति की निगरानी की जा रही है, ताकि लंबित मामलों में मजबूत अभियोजन के जरिए दोषियों को कानून के मुताबिक सजा दिलाई जा सके।