सिद्धार्थनगर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में जनकल्याण और पशुपालकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 50वीं वाहिनी, बलरामपुर ने गुरुवार को महादेव बुजुर्ग क्षेत्र के मानपुर गांव में निःशुल्क पशु चिकित्सा ओपीडी का आयोजन किया। शिविर में बड़ी संख्या में पशुपालकों ने अपने पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण कराया। विशेषज्ञों ने उपचार के साथ वैज्ञानिक पशुपालन, टीकाकरण और रोगों की रोकथाम संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी।
सांसद ने सराही एसएसबी की पहल
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल शामिल हुए। उन्होंने एसएसबी द्वारा सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित जनहितकारी गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यदि पशुओं का समय पर उपचार और उचित देखभाल सुनिश्चित हो तो पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने पशुपालकों से वैज्ञानिक तरीके अपनाने और पशुओं के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की अपील की।
विशेषज्ञों ने दिए स्वास्थ्य और देखभाल के टिप्स
निःशुल्क पशु चिकित्सा ओपीडी में क्षेत्र के पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक उपचार और चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। विशेषज्ञों ने पशुओं के नियमित टीकाकरण, संतुलित आहार, स्वच्छता, संक्रामक रोगों की रोकथाम तथा आधुनिक एवं वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों पर विस्तार से जानकारी दी। इससे पशुपालकों को पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने और बीमारियों से बचाव के उपायों की जानकारी मिली।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में एसजी मुख्यालय गोरखपुर के सीवीओ चंदन तालुकदार, 50वीं वाहिनी के सहायक कमांडेंट एवं मेडिकल अधिकारी अरुण चौधरी, सहायक कमांडेंट अजय कुमार, संजय के.पी., दीपक चंद, नगर पंचायत बढ़नी के अध्यक्ष सुनील अग्रहरी तथा समाजसेवी अनिल अग्रहरि समेत कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने नियमित शिविर की उठाई मांग
शिविर में सूर्य प्रकाश पाण्डेय, नीलू चौधरी, बरकत, लक्की, रमेश गुप्ता, राम पाल सिंह, संजय दुबे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और पशुपालक शामिल हुए। कार्यक्रम के समापन पर ग्रामीणों ने एसएसबी की इस जनहितकारी पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे निःशुल्क पशु स्वास्थ्य एवं जागरूकता शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाने की अपेक्षा जताई। अधिकारियों ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसहभागिता और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ऐसे कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे।