सिद्धार्थनगर में साइबर फ्रॉड के मामलों में पुलिस ने पीड़ितों की ठगी गई रकम वापस कराने में सफलता हासिल की है। मिश्रौलिया थाना क्षेत्र में साइबर फ्रॉड के ₹2,583 और त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र में ₹1,045 पीड़ितों के खातों में वापस कराए गए। दोनों मामलों में पीड़ितों ने एनसीआरपी पोर्टल के जरिए वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद संबंधित थाना साइबर टीम ने बैंक से समन्वय कर रकम की रिकवरी कराई।
मिश्रौलिया में ₹2,583 की रकम वापस
मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के बभनी निवासी इफ्तेखार पुत्र अताउल्लाह ने 3 जुलाई 2026 को एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से वित्तीय फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद थाना मिश्रौलिया की साइबर टीम ने मामले में कार्रवाई शुरू की।पुलिस के अनुसार, साइबर टीम ने बैंक के साथ समन्वय कर फ्रॉड से संबंधित ₹2,583 की रकम की रिकवरी कराई। इसके बाद पूरी धनराशि शिकायतकर्ता इफ्तेखार के खाते में वापस करा दी गई।
त्रिलोकपुर में ₹1,045 की रिकवरी
दूसरा मामला त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र का है। फूलपुर निवासी केसर जहां पत्नी आरिफ ने 17 अप्रैल 2026 को एनसीआरपी पोर्टल पर वित्तीय फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत संख्या 33104260084519 के आधार पर साइबर टीम ने रकम की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस के मुताबिक, थाना त्रिलोकपुर साइबर सेल टीम ने बैंक के साथ समन्वय कर MRM पोर्टल के माध्यम से फ्रॉड की पूरी रकम ₹1,045 पीड़िता के खाते में वापस करा दी। यह रकम 2 अक्टूबर 2026 को खाते में लौटाई गई।
एसएसपी के अभियान के तहत कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराध और साइबर क्राइम रिकवरी को लेकर चलाए जा रहे अभियान के तहत दोनों मामलों में कार्रवाई की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के अभियान के तहत अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद के निर्देशन और संबंधित क्षेत्राधिकारियों के पर्यवेक्षण में टीमों ने रकम वापस कराने की प्रक्रिया पूरी की।
दोनों थानों की टीम ने संभाली जिम्मेदारी
मिश्रौलिया मामले में थानाध्यक्ष रामदेव, उपनिरीक्षक दिग्विजयनाथ दूबे, कांस्टेबल आशुतोष सिंह, आकाश कुमार और महिला आरक्षी अनुराधा गुप्ता की भूमिका रही। वहीं त्रिलोकपुर मामले में थानाध्यक्ष अनूप कुमार मिश्र, उपनिरीक्षक गणेश कुमार, हेड कांस्टेबल रवि कुमार, कांस्टेबल अरुण कुमार यादव और महिला कांस्टेबल प्रीति ने कार्रवाई की। पुलिस का कहना है कि साइबर फ्रॉड की शिकायत मिलने पर समय से सूचना देने और बैंक स्तर पर समन्वय से रकम की रिकवरी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।