सिद्धार्थनगर जिले के खुनियांव क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लटेरा का सोमवार को आकस्मिक एवं विस्तृत निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में ओपीडी, चिकित्सकीय सेवाओं, मानव संसाधन, पैथोलॉजी लैब, एक्स-रे, प्रसव केंद्र और साफ-सफाई की व्यवस्थाओं को परखा गया। मरीजों को समय पर बेहतर उपचार और जांच की सुविधा देने के लिए संबंधित कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
ओपीडी में कार्य विभाजन पर जोर
निरीक्षण के दौरान बाह्य रोगी विभाग की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। उपलब्ध चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच काम का बेहतर बंटवारा करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि सीमित मानव संसाधनों का व्यवस्थित उपयोग किया जाए, ताकि मरीजों को अनावश्यक इंतजार न करना पड़े और उन्हें समयबद्ध चिकित्सकीय परामर्श व उपचार मिल सके।
ग्रामीणों ने उठाई लैब-एक्स-रे की मांग
स्वास्थ्य केंद्र पर पैथोलॉजी लैब और एक्स-रे जांच की सुविधा शुरू कराने की ग्रामीणों की मांग को भी गंभीरता से लिया गया। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि इन सुविधाओं को शुरू कराने के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने की दिशा में प्रयास किया जाएगा। इसके लिए उच्च शिक्षा मंत्री से समन्वय और वार्ता कर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने पर चर्चा की गई।
लेबर रूम में कमियां तत्काल दूर करने के निर्देश
प्रसव केंद्र का भी गहन निरीक्षण किया गया। यहां मातृ और शिशु सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। प्रसव कक्ष में जो कमियां सामने आईं, उन्हें चिह्नित कर संबंधित स्टाफ को तत्काल दूर करने को कहा गया। प्रसव के दौरान जरूरी व्यवस्थाओं और मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
सफाई और संक्रमण नियंत्रण पर सख्ती
स्वास्थ्य केंद्र के परिसर, वार्ड और प्रसव कक्ष में साफ-सफाई की स्थिति भी देखी गई। संक्रमण नियंत्रण के लिए नियमित सैनिटाइजेशन कराने और स्वच्छता व्यवस्था को लगातार बेहतर रखने के निर्देश दिए गए। परिसर में मरीजों और तीमारदारों के लिए साफ वातावरण बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पर फोकस
निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य केंद्र की मौजूदा व्यवस्थाओं की कमियों को चिन्हित कर उन्हें दूर करना और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना रहा। लैब और एक्स-रे जैसी जांच सुविधाएं शुरू होने से मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही जांच की सुविधा मिल सकेगी और उन्हें दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों का रुख नहीं करना पड़ेगा। वहीं प्रसव केंद्र और स्वच्छता व्यवस्था में सुधार से मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की उम्मीद है।