TaraiTimes
सिद्धार्थनगर का अपना समाचार संसार
होम एडमिनिस्ट्रेटिव कंर्टोवर्सी कॉरपोरेट एक्सीडेंट करप्शन डोमेस्टिक वाइलेंस मर्डर रेड रेप रॉबरी सुसाइड क्राइम (अन्य) एजुकेशन हेल्थ अपडेट मोटिवेशनल नेचुरल क्लेमिटी पॉलिटिकल प्रोटेस्ट रिलीजन सोशल वेलफेयर स्टार्टअप ट्रैवेल अन्य
🔐 स्टाफ लॉगिन

मृत्युभोज नहीं, श्रद्धांजलि ही पर्याप्त: इटवा के खैराखास में उठी कुरीति के खिलाफ आवाज, लोगों ने सामूहिक शपथ लेकर किया बहिष्कार

 इटवा के खैराखास में उठी कुरीति के खिलाफ आवाज, लोगों ने सामूहिक शपथ लेकर किया बहिष्कार

सिद्धार्थनगर जिले में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता अभियान के तहत मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के खैरा खास गांव में शनिवार को एक अनूठी पहल देखने को मिली। दी बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया के तत्वावधान में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मृत्युभोज का सामूहिक बहिष्कार किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने भविष्य में मृत्युभोज न करने और समाज में इस कुरीति के खिलाफ जागरूकता फैलाने की शपथ ली। कार्यक्रम की शुरुआत दिवंगत रामकरन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने से हुई। इसके बाद बौद्धाचार्य डॉ. जेपी बौद्ध ने उपस्थित अनुयायियों को त्रिशरण एवं पंचशील ग्रहण कराया।

सामाजिक जागरूकता से खत्म होगी कुरीति

सभा को संबोधित करते हुए सोसायटी के प्रांतीय उपाध्यक्ष केदारनाथ आजाद ने कहा कि मृत्युभोज जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के लिए व्यापक जनजागरण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह समाज से सती प्रथा और बाल विवाह जैसी कुरीतियां खत्म हुई हैं, उसी तरह जागरूकता के बल पर मृत्युभोज जैसी परंपराएं भी समाप्त की जा सकती हैं।

बौद्ध धर्म आडंबर नहीं, वैज्ञानिक सोच सिखाता है 

जिलाध्यक्ष राममिलन गौतम ने कहा कि बौद्ध धर्म वैज्ञानिक सोच और तर्क पर आधारित है। इसमें ढोंग, पाखंड और कर्मकांड का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि इसी विचारधारा के तहत संगठन समाज से मृत्युभोज जैसी परंपराओं को समाप्त करने का अभियान चला रहा है। जिला उपाध्यक्ष डॉ. जेपी बौद्ध ने कहा कि अधिकांश लोग अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव के कारण मृत्युभोज का आयोजन करते हैं। यदि समाज इस दबाव को समाप्त कर दे, तो यह कुरीति स्वतः खत्म हो सकती है।

कानून के पालन की भी उठी मांग

तहसील अध्यक्ष अनिल कुमार गौतम ने कहा कि मृत्युभोज को रोकने के लिए बने कानूनों का प्रभावी पालन कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित अधिनियमों का सख्ती से अनुपालन हो और सामाजिक सहयोग मिले, तो इस कुरीति पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। उन्होंने अन्य राज्यों में इस दिशा में किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया।

श्रद्धांजलि सभा बनी सामाजिक संदेश का मंच

कार्यक्रम के दौरान आयोजक मुकेश की सराहना की गई, जिन्होंने अपने पिता के निधन के बाद पारंपरिक मृत्युभोज का आयोजन न कर श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने का निर्णय लिया। वक्ताओं ने इसे समाज के लिए प्रेरणादायक पहल बताया। कार्यक्रम के संचालक एवं जिला उपाध्यक्ष जयकिशोर गौतम ने कहा कि समाज के संपन्न और प्रभावशाली लोगों को भी इस अभियान से जुड़कर सामाजिक परिवर्तन में भूमिका निभानी चाहिए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया तथा मृत्युभोज का बहिष्कार करने का सामूहिक संकल्प लिया।

संबंधित खबरें

अन्य 📍 Itwa

भनवापुर में 14 बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचे पूर्व मंत्री: तेनुई से बामदेई तक ग्रामीणों का दर्द सुना, नाव और फसल मुआवजे के निर्देश

और पढ़ें →
तेनुई से बामदेई तक ग्रामीणों का दर्द सुना, नाव और फसल मुआवजे के निर्देश
अन्य 📍 Siddharthnagar

सिद्धार्थनगर के बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचे कपिलवस्तु विधायक: फसल नुकसान का स्थलीय सर्वे कराने के निर्देश, प्रभावित परिवारों को सहायता का भरोसा

और पढ़ें →
 फसल नुकसान का स्थलीय सर्वे कराने के निर्देश, प्रभावित परिवारों को सहायता का भरोसा
अन्य 📍 Siddharthnagar

शोहरतगढ़ के बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचे डॉ. नादिर सलाम: ग्रामीणों से जाना हाल, बिजली-खाद्य सामग्री और फसल मुआवजे की उठाई मांग

और पढ़ें →
ग्रामीणों से जाना हाल, बिजली-खाद्य सामग्री और फसल मुआवजे की उठाई मांग
अन्य 📍 इटवा/ एम. अंसारी

सिद्धार्थनगर में उमरा के लिए रवाना हुआ दंपती, गांव में खुशी का माहौल: तुरकौलिया तिवारी में फूल-मालाओं से हुआ स्वागत, मक्का-मदीना में अमन की दुआ करेंगे

और पढ़ें →
 तुरकौलिया तिवारी में फूल-मालाओं से हुआ स्वागत, मक्का-मदीना में अमन की दुआ करेंगे