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मृत्युभोज नहीं, श्रद्धांजलि ही पर्याप्त: इटवा के खैराखास में उठी कुरीति के खिलाफ आवाज, लोगों ने सामूहिक शपथ लेकर किया बहिष्कार

 इटवा के खैराखास में उठी कुरीति के खिलाफ आवाज, लोगों ने सामूहिक शपथ लेकर किया बहिष्कार

सिद्धार्थनगर जिले में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता अभियान के तहत मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के खैरा खास गांव में शनिवार को एक अनूठी पहल देखने को मिली। दी बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया के तत्वावधान में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मृत्युभोज का सामूहिक बहिष्कार किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने भविष्य में मृत्युभोज न करने और समाज में इस कुरीति के खिलाफ जागरूकता फैलाने की शपथ ली। कार्यक्रम की शुरुआत दिवंगत रामकरन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने से हुई। इसके बाद बौद्धाचार्य डॉ. जेपी बौद्ध ने उपस्थित अनुयायियों को त्रिशरण एवं पंचशील ग्रहण कराया।

सामाजिक जागरूकता से खत्म होगी कुरीति

सभा को संबोधित करते हुए सोसायटी के प्रांतीय उपाध्यक्ष केदारनाथ आजाद ने कहा कि मृत्युभोज जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के लिए व्यापक जनजागरण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह समाज से सती प्रथा और बाल विवाह जैसी कुरीतियां खत्म हुई हैं, उसी तरह जागरूकता के बल पर मृत्युभोज जैसी परंपराएं भी समाप्त की जा सकती हैं।

बौद्ध धर्म आडंबर नहीं, वैज्ञानिक सोच सिखाता है 

जिलाध्यक्ष राममिलन गौतम ने कहा कि बौद्ध धर्म वैज्ञानिक सोच और तर्क पर आधारित है। इसमें ढोंग, पाखंड और कर्मकांड का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि इसी विचारधारा के तहत संगठन समाज से मृत्युभोज जैसी परंपराओं को समाप्त करने का अभियान चला रहा है। जिला उपाध्यक्ष डॉ. जेपी बौद्ध ने कहा कि अधिकांश लोग अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव के कारण मृत्युभोज का आयोजन करते हैं। यदि समाज इस दबाव को समाप्त कर दे, तो यह कुरीति स्वतः खत्म हो सकती है।

कानून के पालन की भी उठी मांग

तहसील अध्यक्ष अनिल कुमार गौतम ने कहा कि मृत्युभोज को रोकने के लिए बने कानूनों का प्रभावी पालन कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित अधिनियमों का सख्ती से अनुपालन हो और सामाजिक सहयोग मिले, तो इस कुरीति पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। उन्होंने अन्य राज्यों में इस दिशा में किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया।

श्रद्धांजलि सभा बनी सामाजिक संदेश का मंच

कार्यक्रम के दौरान आयोजक मुकेश की सराहना की गई, जिन्होंने अपने पिता के निधन के बाद पारंपरिक मृत्युभोज का आयोजन न कर श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने का निर्णय लिया। वक्ताओं ने इसे समाज के लिए प्रेरणादायक पहल बताया। कार्यक्रम के संचालक एवं जिला उपाध्यक्ष जयकिशोर गौतम ने कहा कि समाज के संपन्न और प्रभावशाली लोगों को भी इस अभियान से जुड़कर सामाजिक परिवर्तन में भूमिका निभानी चाहिए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया तथा मृत्युभोज का बहिष्कार करने का सामूहिक संकल्प लिया।

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