सिद्धार्थनगर जिले में ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत जिला मॉनिटरिंग सेल और इटवा थाना पुलिस की प्रभावी पैरवी से नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को कठोर सजा सुनाई गई है। सिद्धार्थनगर की विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और कुल 65 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। फैसला 21 सितंबर 2026 को सुनाया गया। मामला इटवा थाने में वर्ष 2019 में दर्ज मुकदमे से जुड़ा है। न्यायालय ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के दौरान प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर आरोपी को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
पॉक्सो एक्ट में 20 साल का कठोर कारावास
पुलिस के अनुसार, इटवा थाने में दर्ज मुकदमे में आरोपी मुबारक पुत्र इकबाल, निवासी बढ़या, के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366 और 376(3) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो न्यायालय में हुई। न्यायालय ने धारा 376(3) भारतीय दंड संहिता के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अर्थदंड भी लगाया गया।
अपहरण की धाराओं में भी सजा
अदालत ने मामले में आरोपी को धारा 366 के तहत पांच वर्ष के कठोर कारावास और धारा 363 के तहत तीन वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया। सभी धाराओं में लगाए गए अर्थदंड को मिलाकर कुल 65 हजार रुपए का जुर्माना निर्धारित किया गया है। पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई अपराधियों को सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे।ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी का हिस्सा है। इस अभियान में गंभीर मामलों में न्यायालय में मजबूत पैरवी कर दोषियों को सजा दिलाने पर जोर दिया जा रहा है।
मॉनिटरिंग सेल ने की मामले की पैरवी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के निर्देशन में जिला मॉनिटरिंग सेल और थाना स्तर से मामले की लगातार निगरानी की गई। पुलिस ने अभियोजन पक्ष के साथ समन्वय कर न्यायालय में प्रभावी पैरवी कराई। मामले में अभियोजक पवन कुमार कर पाठक और थाना इटवा के न्यायालय पैरोकार आरक्षी संजय चौरसिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। पुलिस के अनुसार, इनकी पैरवी और समन्वय से मामले की सुनवाई के दौरान आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराई गई।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत कार्रवाई
पुलिस विभाग की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन का उद्देश्य गंभीर अपराधों के मामलों में प्रभावी अभियोजन और न्यायालय में मजबूत पैरवी के जरिए दोषियों को सजा दिलाना है। इटवा के इस मामले में अदालत के फैसले को इसी अभियान के तहत पुलिस की पैरवी की कार्रवाई के रूप में बताया गया है। पुलिस अधिकारियों ने अभियोजन टीम, जिला मॉनिटरिंग सेल और न्यायालय पैरोकार के प्रयासों को सराहनीय बताया है।