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बरांव शरीफ में आज सजेगी आस्था की महफिल: 60वें उर्स में उमड़ेंगे हजारों अकीदतमंद, होगी दस्तारबंदी और चादरपोशी

60वें उर्स में उमड़ेंगे हजारों अकीदतमंद, होगी दस्तारबंदी और चादरपोशी

सिद्धार्थनगर। गोल्हौरा थाना क्षेत्र के बरांव स्थित दारुल उलूम फ़ैज़ुर रसूल (बरांव शरीफ) में बुधवार को संस्थापक हज़रत शुऐबुल औलिया अलैहिर्रहमा का 60वां उर्स-ए-पाक पूरे धार्मिक उत्साह और अकीदत के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से उलमा-ए-किराम, मशाइख़-ए-इज़ाम, मुफ़्ती, हाफ़िज़, क़ारी और हजारों अकीदतमंदों के पहुंचने की संभावना है। उर्स को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

चादरपोशी से होगी उर्स की शुरुआत

उर्स की सरपरस्ती खानकाह फ़ैज़ुर रसूल के सज्जादा नशीन एवं दारुल उलूम फ़ैज़ुर रसूल के नाज़िम-ए-आला हज़रत अल्लामा गुलाम अब्दुल क़ादिर अलवी कर रहे हैं। कार्यक्रम की सदारत नायब सज्जादा नशीन पीर मुफ़्ती मुहम्मद आसिफ़ अलवी अज़हरी करेंगे, जबकि अल्लामा अली हसन अलवी अज़हरी नेतृत्व करेंगे और मुहम्मद शुऐब अलवी अज़हरी कार्यक्रम के हिमायती रहेंगे।

नमाज़-ए-मग़रिब के बाद पारंपरिक चादरपोशी का जुलूस निकाला जाएगा, जिसमें सज्जादा नशीन, खानकाह के पदाधिकारी, उलमा और बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल होंगे। इसके बाद मज़ार-ए-पाक पर फ़ातिहाख़्वानी होगी और देश में अमन, भाईचारा, तरक्की एवं खुशहाली के लिए विशेष दुआ की जाएगी।

दस्तारबंदी में छात्रों को मिलेगी सनद

नमाज़-ए-इशा के बाद दारुल उलूम फ़ैज़ुर रसूल का वार्षिक जलसा-ए-दस्तारबंदी आयोजित होगा। इस दौरान छह दर्जन से अधिक छात्रों को आलिम, मुफ़्ती, हाफ़िज़ और क़ारी की सनदें प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। देशभर से आए इस्लामिक विद्वान और उलमा अपने संबोधन में हज़रत शुऐबुल औलिया के धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक योगदान पर प्रकाश डालेंगे।

इल्म और समाज सेवा की परंपरा पर होगा विमर्श

वक्ताओं द्वारा दारुल उलूम फ़ैज़ुर रसूल की शिक्षा और समाज सेवा की भूमिका को भी रेखांकित किया जाएगा। बताया जाएगा कि इस संस्थान से शिक्षा प्राप्त कर चुके मुफ़्ती, आलिम, हाफ़िज़ और क़ारी भारत ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों में इस्लामी शिक्षा, सामाजिक सुधार और मानव सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

श्रद्धालुओं के लिए व्यापक इंतजाम

आयोजकों के अनुसार उर्स में आने वाले ज़ायरीन के लिए ठहरने, भोजन, पेयजल, रोशनी, साफ-सफाई और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर भी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। धार्मिक, आध्यात्मिक और शैक्षिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध बरांव शरीफ का यह ऐतिहासिक उर्स वर्षों से देश-विदेश के अकीदतमंदों की आस्था का केंद्र रहा है। 60वें उर्स-ए-पाक में भी रूहानियत, इल्म, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश देने वाले कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिनमें हजारों श्रद्धालु शामिल होकर इबादत, दुआ और दस्तारबंदी की रस्मों में शिरकत करेंगे।

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