सिद्धार्थनगर में जमीन संबंधी विवादों के त्वरित और त्रुटिरहित निस्तारण की दिशा में जिला प्रशासन ने आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया है। सोमवार को जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने शोहरतगढ़ तहसील के ग्राम परसिया पहुंचकर उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा-24 के तहत रोवर तकनीक से किए जा रहे सीमांकन कार्य का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि सीमांकन के अधिक से अधिक मामलों में इस तकनीक का उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को समयबद्ध और निष्पक्ष न्याय मिल सके।
रोवर तकनीक से होगा सटीक सीमांकन
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जिलाधिकारी को रोवर तकनीक के माध्यम से किए जा रहे सीमांकन की प्रक्रिया से अवगत कराया। बताया गया कि इस आधुनिक तकनीक से किसी भी गाटा (खसरा) की वास्तविक स्थिति का सटीक निर्धारण किया जा सकता है। पारंपरिक तरीकों की तुलना में इसमें त्रुटि की संभावना बेहद कम रहती है, जिससे सीमांकन अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनता है।
जमीन विवादों के समाधान में मिलेगी तेजी
जिलाधिकारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने काश्तकारों की समस्याओं के त्वरित समाधान और भूमि विवादों को कम करने के उद्देश्य से यह तकनीक उपलब्ध कराई है। खेतों की मेड़ और कब्जे को लेकर होने वाले विवादों के निस्तारण में रोवर तकनीक बेहद उपयोगी साबित होगी। इससे राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में भी पारदर्शिता आएगी और अनावश्यक विवादों पर अंकुश लगेगा।
अधिक से अधिक मामलों में तकनीक अपनाने के निर्देश
जिलाधिकारी ने राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया कि धारा-24 के तहत लंबित सीमांकन मामलों का प्राथमिकता के आधार पर रोवर तकनीक से निस्तारण कराया जाए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग से किसानों को राहत मिलेगी और राजस्व मामलों के निस्तारण की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
राजस्व अधिकारी रहे मौजूद
निरीक्षण के दौरान उपजिलाधिकारी शोहरतगढ़ करमेन्द्र, तहसीलदार प्रकाश सिंह, नायब तहसीलदार माधुर्य यादव, राजस्व निरीक्षक बृजेश त्रिपाठी तथा क्षेत्र के लेखपाल मौजूद रहे। अधिकारियों ने जिलाधिकारी को सीमांकन की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया। जिलाधिकारी ने राजस्व टीम से तकनीक का प्रभावी उपयोग कर लंबित मामलों के शीघ्र और निष्पक्ष निस्तारण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।