सिद्धार्थनगर में तीन दिन तक तराई को झकझोरने वाला तूफान अर्नब रविवार को थम गया, लेकिन खेतों में तबाही और किसानों के सामने नुकसान का बड़ा सवाल छोड़ गया। 72 घंटे से अधिक समय तक हुई बारिश और तेज हवाओं ने अगैती धान और केले की तैयार फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। कई खेतों में धान की फसल पूरी तरह जमीन पर बिछ गई है। वहीं, केले के पौधे फल समेत गिर गए हैं। खेतों में पानी जमा होने से गिरी फसल के सड़ने की आशंका ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।बारिश थमने के बाद सोमवार को धूप निकली तो लोगों को मौसम से राहत मिली, लेकिन किसानों के लिए असली राहत अभी खेतों से पानी निकलने और बची फसल सुरक्षित रहने पर निर्भर है।
पकने से पहले खेत में बिछ गया धान
तेज हवा और बारिश की मार से अगैती धान की लहलहाती फसल खेतों में गिर गई। कहीं धान की बालियां पानी में डूबी हैं तो कहीं पूरी फसल जमीन पर पड़ी दिखाई दे रही है। फसल पकने की ओर बढ़ रही थी, ऐसे में अचानक मौसम बिगड़ने से किसानों को पैदावार में भारी कमी की चिंता सताने लगी है। खेतों में पानी भरा होने के कारण किसान गिरी फसल को तत्काल संभाल भी नहीं पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि खेतों से पानी जल्द नहीं निकला और नमी बनी रही तो धान की बालियों में सड़न आ सकती है। इससे नुकसान और बढ़ने की आशंका है।
केले की तैयार फसल पर सबसे बड़ी मार
तूफान का असर खुनियांव क्षेत्र में केले की फसल पर भी साफ दिखाई दिया। टेऊवा ग्रांट, मोहम्मद नगर, केरवनिया, केवटहिया, डोकम, मिश्रौलिया खालसा, बेलवा, सेमरा भरभर साथा और सिहुनिया समेत दर्जनों गांवों में केले के पौधे तेज हवा से गिर गए।किसानों के मुताबिक इन खेतों में केले की फसल कटाई के लिए तैयार थी और कई पौधे फलों से लदे हुए थे। बुधवार रात से शनिवार रात तक लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण तैयार फसल जमीन पर गिर गई।
किसानों का दावा, 50-60% फसल बर्बाद
किसानों का दावा है कि क्षेत्र में तैयार केले की करीब 50 से 60 प्रतिशत फसल तेज हवा और बारिश की वजह से गिरकर बर्बाद हो गई है। कई खेतों में फल समेत पौधे जमीन पर पड़े हैं। इससे महीनों की मेहनत और खेती में लगाई गई लागत पर संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित किसानों में लईक अहमद, इजहार अहमद, धर्मराज, मतलूब अली, अंग्रेज, वारिश अली, इसरार अहमद, सजानू, रमई, तमई, कपिल, अफाक अहमद, इबरार अहमद, मारूफ अहमद, हयात चौधरी, राम जियावन और राम प्रसाद समेत अन्य शामिल हैं।
10-12 रुपए का भाव, अब 5-7 रुपए में बिक्री
किसानों के मुताबिक मौसम की मार से पहले कच्चे केले का भाव करीब 10 से 12 रुपए प्रति किलो था। फसल गिरने के बाद टूटे और गिरे केले को मजबूरी में करीब 5 से 7 रुपए प्रति किलो तक बेचना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि पहले मिलने वाला भाव भी बढ़ती लागत और महंगाई के मुकाबले पर्याप्त नहीं था। अब तैयार फसल का बड़ा हिस्सा गिर जाने से लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
पेड़ गिरे, रास्तों पर भी असर
तूफान की मार खेतों तक सीमित नहीं रही। गांवों और सड़कों के किनारे खड़े सैकड़ों पेड़ और पौधे तेज हवा का दबाव नहीं झेल सके। कई जगह टूटे तने और बिखरी डालियां सोमवार को भी तूफान की रफ्तार की तस्वीर दिखाती रहीं। ग्रामीण इलाकों में रास्तों के किनारे और खेतों के बीच गिरे पेड़ों से आवागमन में भी परेशानी हुई।
सर्वे के बाद मदद का भरोसा
किसानों का कहना है कि अचानक आई प्राकृतिक आपदा से केले की खेती पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। यदि समय रहते नुकसान का सर्वे कराकर क्षतिपूर्ति नहीं मिली तो किसान केले की खेती से पीछे हट सकते हैं। किसानों के अनुसार केले की खेती के कारण क्षेत्र को ‘मिनी भुसावल’ के रूप में पहचान मिली है और लगातार नुकसान से इस खेती पर असर पड़ सकता है। प्रशासन ने बताया कि आपदा से हुए नुकसान का आकलन कराया जाएगा। केला किसानों को नियमानुसार हर संभव मदद दिलाने का प्रयास किया जाएगा।