सिद्धार्थनगर जिले के इटवा स्थित शर्मा होम्योपैथिक चिकित्सालय एंड रिसर्च सेंटर में गुरुवार को होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के जनक डॉ. सैमुअल फ्रेडरिक क्रिश्चियन हैनिमैन की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर चिकित्सकों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति की उपयोगिता, विस्तार और वर्तमान समय में इसकी भूमिका पर विचार साझा किए। कार्यक्रम में क्षेत्र के कई होम्योपैथिक चिकित्सक एवं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हुए।
होम्योपैथी की बढ़ती स्वीकार्यता पर चर्चा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश के चीफ होम्योपैथिक कंसल्टेंट डॉ. भास्कर शर्मा ने कहा कि डॉ. हैनिमैन ने होम्योपैथी को एक व्यवस्थित चिकित्सा पद्धति के रूप में विकसित किया, जिसके सिद्धांत आज भी चिकित्सा जगत का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्व के अनेक देशों में होम्योपैथी को मान्यता प्राप्त है और भारत में भी इसकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कम लागत में उपचार उपलब्ध होने के कारण बड़ी संख्या में मरीज इस चिकित्सा पद्धति की ओर आकर्षित हो रहे हैं। विभिन्न रोगों के उपचार में भी होम्योपैथी का उपयोग बढ़ा है, जिससे इसकी लोकप्रियता में निरंतर वृद्धि हो रही है।
सेवा भावना से उपचार का दिया संदेश
डॉ. भास्कर शर्मा ने चिकित्सकों से मरीजों के प्रति संवेदनशील और सेवा भाव से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज में होम्योपैथी को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसके बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकें। कार्यक्रम में उपस्थित चिकित्सकों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए चिकित्सा सेवा में नैतिक मूल्यों और रोगी हित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
कई चिकित्सक रहे मौजूद
पुण्यतिथि कार्यक्रम में डॉ. चंद्रशेखर वर्मा, डॉ. महेंद्र शुक्ला, डॉ. मनोज शर्मा, डॉ. अजीत, डॉ. दिनेश कुमार मौर्य, देवी प्रसाद मौर्य, संतोष कुमार, महेश कुमार सहित अन्य चिकित्सक एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन डॉ. हैनिमैन के योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुआ।