सिद्धार्थनगर जिला कारागार में बंदियों के पुनर्वास कार्यक्रम के तहत मनोरंजक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। बंदियों की मांग पर कारागार प्रशासन ने यूट्यूब प्लेटफॉर्म के माध्यम से फिल्म ‘हनुमान अंश’ का प्रदर्शन कराया। फिल्म देखने को लेकर बंदियों में खासा उत्साह रहा। अलग-अलग प्रसंगों को बंदियों ने रुचि और एकाग्रता के साथ देखा। फिल्म समाप्त होने के बाद कई बंदी भाव-विभोर नजर आए।
पुनर्वास में मनोरंजन भी अहम हिस्सा
कारागार में बंदियों के पुनर्वास की प्रक्रिया को केवल शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। मानसिक और भावनात्मक स्तर पर सकारात्मक माहौल उपलब्ध कराना भी पुनर्वास का हिस्सा है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर मनोरंजक और सांस्कृतिक गतिविधियां कराई जाती हैं। कारागार प्रशासन के अनुसार, ऐसी गतिविधियां बंदियों को नियमित और एक जैसी दिनचर्या से अलग रचनात्मक अनुभव देती हैं। इससे उनके मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच और सामाजिक व्यवहार को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। फिल्म प्रदर्शन को भी इसी क्रम की गतिविधि के रूप में आयोजित किया गया।
जगह कम, इसलिए शिफ्ट में दिखाई फिल्म
फिल्म देखने के लिए सभी बंदियों को एक साथ बैठाना संभव नहीं था। बैरक में उपलब्ध स्थान सीमित होने के कारण प्रशासन ने करीब 150 बंदियों की एक शिफ्ट तैयार की। इसके तहत उपलब्ध जगह और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए बंदियों को क्रमवार फिल्म देखने का अवसर दिया गया। शिफ्ट व्यवस्था के कारण कार्यक्रम को बिना भीड़ और अव्यवस्था के संचालित किया गया। बंदियों को तय व्यवस्था के अनुसार फिल्म दिखाई गई और पूरी गतिविधि अनुशासित तरीके से संपन्न कराई गई।
धार्मिक प्रसंगों में दिखी विशेष रुचि
फिल्म के विभिन्न प्रसंगों के दौरान बंदी काफी रुचि के साथ स्क्रीन पर नजरें टिकाए रहे। खासकर हनुमान से जुड़े प्रसंगों को लेकर उनमें विशेष उत्सुकता दिखाई दी। फिल्म समाप्त होने के बाद कई बंदियों के चेहरे पर भावुकता भी नजर आई। कारागार प्रशासन का जोर ऐसे कार्यक्रमों के जरिए बंदियों को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर है। अधिकारियों का मानना है कि जेल के भीतर अनुशासित वातावरण के साथ रचनात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियों का संतुलन बंदियों के पुनर्वास की प्रक्रिया को बेहतर आधार दे सकता है।
आगे भी गतिविधियों पर जोर
जिला कारागार में पुनर्वास के उद्देश्य से शिक्षा, कौशल विकास और अन्य सकारात्मक गतिविधियों के साथ मनोरंजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। फिल्म प्रदर्शन इसी पहल का हिस्सा रहा। सीमित संसाधनों और स्थान के बावजूद शिफ्ट व्यवस्था अपनाकर बंदियों को कार्यक्रम में शामिल किया गया, ताकि अधिक से अधिक बंदियों को ऐसी गतिविधियों का लाभ मिल सके।