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सिद्धार्थनगर में 34 साल पुरानी शिक्षक भर्ती की फाइल गायब: BSA-दफ्तर से DIET तक नहीं मिला रिकॉर्ड, जांच में खुली बड़ी चूक

BSA-दफ्तर से DIET तक नहीं मिला रिकॉर्ड, जांच में खुली बड़ी चूक

सिद्धार्थनगर जिले में वर्ष 1992 की शिक्षक भर्ती से जुड़ी मूल नियुक्ति पत्रावली गायब होने का मामला सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। एक शिकायत की जांच के दौरान जब 34 वर्ष पुराने भर्ती अभिलेखों की जरूरत पड़ी तो न तो बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय में संबंधित फाइल मिली और न ही जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) बांसी में उसका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध हो सका। इससे भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मूल दस्तावेजों के संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

शिकायत की जांच में खुली रिकॉर्ड की हकीकत

जानकारी के अनुसार, विभाग को एक शिकायत की जांच के दौरान वर्ष 1992 की शिक्षक भर्ती से संबंधित मूल नियुक्ति पत्रावली की आवश्यकता पड़ी। सबसे पहले बीएसए कार्यालय के अभिलेखों की तलाश की गई, लेकिन संबंधित फाइल नहीं मिली। इसके बाद डायट बांसी से रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए पत्राचार किया गया। जवाब में डायट प्रशासन ने भी लिखित रूप से सूचित किया कि उनके पास भी इस भर्ती से संबंधित मूल पत्रावली उपलब्ध नहीं है।

नियुक्त शिक्षकों की संख्या तक स्पष्ट नहीं

मूल रिकॉर्ड के अभाव में विभाग के सामने कई व्यावहारिक दिक्कतें खड़ी हो गई हैं। स्थिति यह है कि अधिकारी फिलहाल यह भी स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं कि वर्ष 1992 की भर्ती में जिले में कुल कितने शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। चयन सूची, नियुक्ति आदेश और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों का सत्यापन भी फिलहाल संभव नहीं हो पा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल, फाइल गई कहां?

मामले ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर मूल नियुक्ति पत्रावली अंतिम बार किस कार्यालय में थी? क्या यह बीएसए कार्यालय से डायट भेजी गई थी या किसी अन्य कार्यालय में स्थानांतरित हुई? यदि भेजी गई थी तो उसका रिकॉर्ड कहां है? फिलहाल इन सवालों का जवाब विभाग के पास भी नहीं है। ऐसे में सरकारी अभिलेखों के रखरखाव और रिकॉर्ड प्रबंधन की व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।

सेवानिवृत्त हो चुके कई शिक्षक

वर्ष 1992 की इस भर्ती को अब 34 वर्ष बीत चुके हैं। इस भर्ती में नियुक्त कई शिक्षक सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं, जबकि कुछ सेवा के अंतिम चरण में हैं। ऐसे समय में मूल नियुक्ति अभिलेखों का गायब होना न केवल विभागीय जांच को प्रभावित कर रहा है, बल्कि भविष्य में किसी भी प्रशासनिक या कानूनी सत्यापन की प्रक्रिया को भी जटिल बना सकता है।

BSA बोले, रिकॉर्ड की तलाश जारी

बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेश कुमार ने बताया कि वर्ष 1992 में नियुक्त शिक्षकों की मूल पत्रावली नहीं मिलने पर डायट बांसी को पत्र भेजा गया था। वहां से भी रिकॉर्ड उपलब्ध न होने की सूचना प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि संबंधित अभिलेखों का पता लगाने के लिए आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जा रही है। विभाग उपलब्ध रिकॉर्ड और अन्य स्रोतों के आधार पर मामले की पड़ताल में जुटा है।

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