सिद्धार्थनगर जिले की इटवा तहसील परिसर में बुधवार को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) की ओर से किसान पंचायत आयोजित की गई। पंचायत में किसानों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई गई। संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि राजस्व और अन्य विभागों में किसानों के मामलों का समय पर निस्तारण नहीं हो रहा है, जिससे उन्हें लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। पंचायत के बाद प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित 17 सूत्रीय मांगपत्र तहसीलदार अजय कुमार को सौंपा गया। संगठन ने मांगों के शीघ्र समाधान की अपेक्षा जताई।
समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
किसान पंचायत को संबोधित करते हुए भाकियू के तहसील प्रभारी मुनीफ खां ने कहा कि किसानों की समस्याओं के प्रति प्रशासन का रवैया संतोषजनक नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि किसानों के राजस्व, प्रमाण पत्र और भूमि संबंधी मामलों का समयबद्ध निस्तारण होना चाहिए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
मांगपत्र में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
भाकियू द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कठेला गर्वी के पीड़ित ग्रामीणों को न्याय दिलाने, कमदालापुर की विवादित भूमि की पैमाइश कराने, तहसील स्तर पर जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़े लंबित आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण, धारा-24 के आदेशों की सूचना संबंधित ग्रामीणों तक पहुंचाने और गांवों में तैनात कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग की गई। इसके अलावा लंबित दाखिल-खारिज मामलों के शीघ्र निस्तारण, चकबंदी से जुड़े मुकदमों का निपटारा, किसान आयोग के गठन तथा फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की प्रभावी व्यवस्था सहित कुल 17 मांगें प्रमुख रूप से रखी गईं।
किसानों ने समस्याओं के त्वरित समाधान की उठाई मांग
पंचायत में मौजूद सादिक किसान ने कहा कि राजस्व, चकबंदी और प्रमाण पत्र संबंधी मामलों का समय पर निस्तारण होने से किसानों की भागदौड़ और आर्थिक नुकसान दोनों कम होंगे। उन्होंने प्रशासन से किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की मांग की। पंचायत में सुभाष किसान, जनार्दन मिश्रा, महेंद्र चौधरी, हरिश्चंद्र, राम संवारे सहित बड़ी संख्या में किसान और भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी मौजूद रहे।