सिद्धार्थनगर जिले के नगर पंचायत इटवा के श्यामा प्रसाद मुखर्जी नगर वार्ड नंबर-4 (आनंद नगर) में रविवार को दी बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया के तत्वावधान में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। सभा में मृत्युभोज जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया गया। उपस्थित लोगों ने सामाजिक दबाव में होने वाले अनावश्यक खर्च को रोकने और भविष्य में मृत्युभोज नहीं करने का सामूहिक संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि किसी परिजन की मृत्यु के बाद परिवार पहले ही दुख और आर्थिक संकट से गुजरता है, ऐसे में सामाजिक दबाव के कारण होने वाला अतिरिक्त खर्च परेशानी बढ़ा देता है।
नीलम गौतम को दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की शुरुआत मृतका नीलम गौतम के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर की गई। इसके बाद बौद्धाचार्य डॉ. जेपी बौद्ध ने उपस्थित अनुयायियों को त्रिशरण एवं पंचशील ग्रहण कराया। सभा में मृत्युभोज को सामाजिक कुरीति बताते हुए इसे समाप्त करने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया।
जागरूकता से खत्म होगी कुरीति
सोसायटी के प्रांतीय उपाध्यक्ष केदारनाथ आजाद ने कहा कि समाज से मृत्युभोज समाप्त करने का जो बीड़ा भारतीय बौद्ध महासभा ने उठाया है, वह एक दिन जरूर सफल होगा। उन्होंने कहा कि समाज में समय के साथ कई कुरीतियां खत्म हुई हैं। सती प्रथा और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता से बदलाव संभव हुआ, उसी तरह मृत्युभोज को भी धीरे-धीरे समाप्त किया जा सकता है। पूर्व विधायक शोहरतगढ़ अमरसिंह चौधरी ने कहा कि बौद्ध धर्म वैज्ञानिक विचारधारा पर आधारित है। इसमें ढोंग, पाखंड, आडंबर और कर्मकांड के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य समाज में फैली मृत्युभोज जैसी कुरीति को जड़ से समाप्त करना है।
खुशी से नहीं, दबाव में करते हैं आयोजन
जिलाध्यक्ष राममिलन गौतम ने कहा कि कोई भी परिवार खुशी से मृत्युभोज नहीं करना चाहता। सामाजिक दबाव और परंपरा के कारण लोग इसे निभाने के लिए मजबूर होते हैं। इससे परिवार पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है। जिला उपाध्यक्ष जयकिशोर गौतम ने मृत्युभोज पर प्रभावी रोक के लिए संबंधित कानूनों का कड़ाई से पालन कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन को इस दिशा में गंभीरता से कदम उठाने चाहिए।
आयोजक ने बेटी की मृत्यु पर नहीं किया कर्मकांड
नगर पंचायत अध्यक्ष विकास जायसवाल ने आयोजक बाबूलाल गौतम के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी पुत्री की अल्पायु में मृत्यु के बाद किसी प्रकार का कर्मकांड और मृत्युभोज नहीं किया। उन्होंने कहा कि मृत्युभोज सामाजिक कुरीति है, जिससे सिर्फ धन की बर्बादी होती है। गरीब परिवार कई बार सामाजिक दबाव में अपनी क्षमता से अधिक खर्च करने को मजबूर हो जाते हैं। उन्होंने मृत्युभोज के बहिष्कार का समर्थन किया।
संपन्न लोगों से आगे आने की अपील
कार्यक्रम संचालक एवं तहसील कोषाध्यक्ष राधेश्याम गौतम ने कहा कि इस कुरीति को समाप्त करने के लिए समाज के संपन्न और प्रभावशाली लोगों को आगे आना होगा। जब समाज के सक्षम लोग मृत्युभोज का बहिष्कार करेंगे तो इसका सकारात्मक संदेश जाएगा और धीरे-धीरे यह परंपरा समाप्त हो सकती है। इस अवसर पर संतोष कुमार आजाद, प्रेमसागर, अनिल बौद्ध, राम बुझारत, मुन्ना प्रधान, शक्तिराम यादव, लालजी चौधरी, इंदल चौधरी, रामबलेशर, रघुवर प्रसाद, दिलीप कुमार, दीपक गौतम समेत बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और अन्य लोग मौजूद रहे।