सिद्धार्थनगर जिले में अपराधियों को त्वरित सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे 'ऑपरेशन कन्विक्शन' के तहत सिद्धार्थनगर पुलिस को मंगलवार को बड़ी सफलता मिली। जिला मॉनिटरिंग सेल और विभिन्न थाना पुलिस की प्रभावी पैरवी के चलते अलग-अलग मामलों में न्यायालय ने 9 अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा और अर्थदंड सुनाया। इनमें मारपीट, छेड़खानी, आर्म्स एक्ट और आयुध अधिनियम से जुड़े मामले शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों ने इसे प्रभावी विवेचना और मजबूत पैरवी का परिणाम बताया।
मारपीट के दो मामलों में छह आरोपी दोषी
थाना उसका बाजार क्षेत्र के दो अलग-अलग मारपीट के मामलों में न्यायालय ने कुल छह आरोपियों को दोषी करार दिया। पहले मामले (एनसीआर-12/2019) में धुसवाराजा गांव निवासी रामप्रसाद, नेवाती, सीमा और पूजा को न्यायालय उठने तक की सजा तथा प्रत्येक पर 1,200 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। वहीं दूसरे मामले (एनसीआर-96/2019) में परसपुर टोला मुड़िला निवासी घिसी और कुशमा देवी को भी न्यायालय उठने तक की सजा सुनाते हुए प्रत्येक पर 1,500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। दोनों मामलों में अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के बाद न्यायालय ने दोषसिद्धि की।
छेड़खानी के आरोपी को दो साल की सजा
थाना ढेबरुआ क्षेत्र में दर्ज छेड़खानी के एक पुराने मामले में न्यायालय ने साबिर पुत्र महीबुल्लाह, निवासी मलगहिया को दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के साधारण कारावास और 3,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और प्रभावी पैरवी के आधार पर आरोपी को दोषी माना।
आर्म्स एक्ट और आयुध अधिनियम में भी दोषसिद्धि
थाना चिल्हिया में दर्ज आर्म्स एक्ट के मामले में इन्द्रकेश केवट को न्यायालय ने जेल में बिताई गई अवधि को ही सजा मानते हुए 500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
वहीं थाना ढेबरुआ में दर्ज आयुध अधिनियम के मामले में राजेश कुमार दूबे को न्यायालय उठने तक की सजा तथा 500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।
प्रभावी पैरवी से मिली सफलता
पुलिस के अनुसार इन सभी मामलों में जिला मॉनिटरिंग सेल ने अभियोजन अधिकारियों और न्यायालय पैरोकारों के साथ समन्वय बनाकर प्रभावी पैरवी की। विभिन्न मामलों में अभियोजक अजय कुमार गौतम, जयहिंद त्रिपाठी तथा संबंधित थानों के न्यायालय पैरोकारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अपराधियों के खिलाफ अभियान रहेगा जारी
पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में संचालित ऑपरेशन कन्विक्शन का उद्देश्य गंभीर और लंबित मामलों में प्रभावी पैरवी कर अपराधियों को शीघ्र सजा दिलाना है। पुलिस का कहना है कि अपराधियों के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा, ताकि कानून का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके और पीड़ितों को समयबद्ध न्याय मिल सके।