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सिद्धार्थनगर में कालानमक धान बना कमाई का मॉडल: 2 हेक्टेयर से ₹3.40 लाख का शुद्ध मुनाफा, किसान ने खरीदा ट्रैक्टर; DM ने खेत पहुंचकर देखा मॉडल

2 हेक्टेयर से ₹3.40 लाख का शुद्ध मुनाफा, किसान ने खरीदा ट्रैक्टर; DM ने खेत पहुंचकर देखा मॉडल

सिद्धार्थनगर जिले में परंपरागत खेती से आगे बढ़कर कालानमक धान की खेती जिले के किसानों के लिए बेहतर आय का जरिया बन रही है। इसका उदाहरण शुक्रवार को बर्डपुर विकास खंड में देखने को मिला, जहां जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने ग्राम पंचायत बर्डपुर नंबर-6 के नोनहवा टोला निवासी किसान जयराम के खेत का निरीक्षण किया। किसान ने पिछले वर्ष कालानमक धान की खेती से करीब 3.40 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया और उसी आय से एक छोटा ट्रैक्टर खरीदा। इस सफलता से प्रेरित होकर इस बार उन्होंने खेती का रकबा भी दोगुना कर दिया है।

खेत में पहुंचकर जानी खेती की पूरी कहानी

निरीक्षण के दौरान किसान जयराम अपने खेत में कालानमक धान की केएन-1 (KN-1) सहित अन्य प्रजातियों की रोपाई कर रहे थे। जिलाधिकारी ने खेती की लागत, उत्पादन, बाजार मूल्य और मुनाफे के बारे में विस्तार से जानकारी ली। किसान ने बताया कि खरीफ 2025 में उन्होंने दो हेक्टेयर क्षेत्रफल में कालानमक धान की खेती की थी।

एक साल में बदली आर्थिक तस्वीर

किसान के अनुसार दो हेक्टेयर खेती में लगभग एक लाख रुपये की लागत आई थी। इस दौरान करीब 45 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ, जिससे लगभग 30 क्विंटल कालानमक चावल तैयार हुआ। इस चावल की बिक्री 14 से 15 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुई, जिससे करीब 4.40 लाख रुपये की आमदनी हुई। लागत निकालने के बाद उन्हें लगभग 3.40 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।

मुनाफे से खरीदा ट्रैक्टर, अब दोगुनी खेती

किसान ने बताया कि कालानमक धान से हुई आय से उन्होंने एक छोटा ट्रैक्टर खरीदा, जिससे खेती करना और आसान हो गया। बेहतर मुनाफे को देखते हुए इस वर्ष उन्होंने कालानमक धान की खेती का रकबा बढ़ाकर चार हेक्टेयर कर दिया है। वर्तमान में पूरे क्षेत्र में कालानमक धान की रोपाई कराई जा रही है।

किसानों के लिए प्रेरणा बना मॉडल

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने किसान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पारंपरिक फसलों के साथ उच्च मूल्य वाली विशेष किस्मों की खेती किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि कालानमक धान की वैज्ञानिक खेती, बेहतर बीज और विपणन संबंधी जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाई जाए, ताकि जिले के अन्य किसान भी इस मॉडल को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।