सिद्धार्थनगर जिले के इटवा तहसील प्रशासन ने बैंक ऋण और राजस्व बकाया वसूली अभियान के तहत मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 18 लाख रुपये के बकाएदार की कृषि भूमि कुर्क कर दी। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि कुर्क की गई जमीन का अब न तो हस्तांतरण किया जा सकेगा और न ही उसकी बिक्री, दान अथवा किसी अन्य प्रकार का लेन-देन संभव होगा। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में इसकी व्यापक चर्चा रही।
बार-बार नोटिस के बाद भी नहीं जमा हुआ बकाया
तहसील प्रशासन के अनुसार पिपरी महरी गांव निवासी कुशलावती देवी पर किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) का ऋण तथा उनके पुत्रों पर अन्य बैंक ऋणों सहित ब्याज मिलाकर लगभग 18 लाख रुपये बकाया था। बकाया वसूली के लिए प्रशासन और बैंक की ओर से कई बार नोटिस जारी किए गए तथा भुगतान के अवसर भी दिए गए, लेकिन निर्धारित अवधि तक राशि जमा नहीं कराई गई। इसके बाद राजस्व वसूली अधिनियम के तहत कुर्की की कार्रवाई अमल में लाई गई।
कई गाटा संख्या की कृषि भूमि हुई कुर्क
एसडीएम के निर्देश पर नायब तहसीलदार विष्णु प्रताप सिंह की अगुवाई में राजस्व टीम ने सिहोरवा मिश्र गांव के गाटा संख्या 115, 116, 120, 121, 122 एवं 123 तथा पिपरी महरी गांव के गाटा संख्या 145, 16, 245, 49, 50 और 54 की कृषि भूमि कुर्क कर दी। अधिकारियों ने मौके पर कुर्की की कार्रवाई पूरी करते हुए संबंधित अभिलेखों में भी आवश्यक प्रविष्टियां दर्ज कराईं।
भूमि के लेन-देन पर पूरी तरह रोक
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कुर्क की गई संपत्ति पर तत्काल प्रभाव से किसी भी प्रकार का हस्तांतरण, बिक्री, दान, बंधक या अन्य कानूनी प्रभार स्वीकार नहीं किया जाएगा। जब तक बकाया राशि जमा नहीं होती अथवा नियमानुसार आदेश नहीं होता, तब तक संपत्ति पर लगी रोक प्रभावी रहेगी।
बकाएदारों को प्रशासन की सख्त चेतावनी
कुर्की की कार्रवाई के दौरान क्षेत्रीय लेखपाल उत्तम कटियार, विवेक पटेल, संग्रह अमीन अरविंद त्रिपाठी, रामफेर, कौलेश्वर पांडेय, कल्पनाथ, संग्रह अनुसेवक अनिल ओझा तथा ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय उप प्रबंधक मनीष पांडेय सहित बैंक एवं राजस्व विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन ने कहा कि सरकारी और बैंक ऋण की वसूली के मामलों में लापरवाही बरतने वाले अन्य बकाएदारों के खिलाफ भी इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।